गाजियाबाद। केंद्र और प्रदेश सरकार बेशक चिकित्सकों की कमी बताकर अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में चिकित्सकों की तैनाती नहीं कर रही है, लेकिन सरकारी अवकाश के बावजूद बृहस्पतिवार को संजयनगर स्थित सीएमओ कार्यालय में हाथ में एमबीबीएस की डिग्री लिए एक दो नहीं 100 से अधिक युवा चिकित्सक साक्षात्कार देने पहुंचे।
खास बात यह है कि जिले में 18 पदों के लिए इतनी भारी संख्या में पहुंचे चिकित्सकों को सभागार में चाय नाश्ता तक कराया गया। साथ ही 50-50 चिकित्सकों के टोकन बनाकर आनन-फानन में दिए गए ताकि साक्षात्कार अगले तीन दिन में पूर्ण किया जाए।
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि साक्षात्कार समिति में उनके अलावा डीपीएम अनुराग, डेम पूजा सक्सैना, परियोजना अधिकारी पीके पांडेय और जिला संयुक्त अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय गुप्ता शामिल हैं। उनके अनुसार स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. माला शर्मा ने भी इंटरव्यू दिया है। पहले दिन 56 चिकित्सकों का इंटरव्यू हो गया है। इंटरव्यू देने डॉ. वंदना भी पहुंची।
यह स्थिति तब और विडंबनापूर्ण लगती है जब आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रति हजार आबादी पर औसतन करीब एक डॉक्टर उपलब्ध है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक इससे अधिक है। उत्तर प्रदेश की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां प्रति हजार आबादी पर लगभग 0.6 चिकित्सक ही उपलब्ध माने जाते हैं। इसके बावजूद यदि 18 पदों के लिए 100 से अधिक योग्य डॉक्टर साक्षात्कार देने पहुंच रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि कमी डॉक्टरों की नहीं, बल्कि नियुक्ति और तैनाती की प्रक्रिया की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भर्ती प्रक्रियाएं नियमित और समयबद्ध हों, तो न सिर्फ अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर हो सकती है, बल्कि बेरोजगार या अल्पकालिक सेवाओं में लगे युवा चिकित्सकों को भी स्थायित्व मिल सकता है। गाजियाबाद का यह दृश्य स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक आईना भी है और चेतावनी भी-जहां योग्यता मौजूद है, लेकिन सिस्टम की गति पीछे छूटती नजर आ रही है।














